बच्चों को अनुशासित करना क्यों है जरुरी, और कैसे करें?

Why is it important to discipline children, and how to do it? (Pic: hindustantimes )

'अनुशासन' का अर्थ है, कि प्रत्येक मनुष्य के लिए निर्धारित किए किए गए नियमों का पालन करना। कहा जाता है, कि एक अनुशासित व्यक्ति ही 'सभ्य समाज' का निर्माण कर पाता है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि सभ्य समाज के निर्माण के लिए प्रत्येक व्यक्ति का अनुशासित होना बेहद जरूरी है। लेकिन जानकार कहते हैं कि अनुशासन की शुरुआत बाल्यावस्था से ही की जाए तो आगे चलकर युवाओं के अंदर अनुशासन विकसित होना आसान हो जाता है। 


अगर बचपन में ही किसी बच्चे को अनुशासन का मतलब ही ना बताया जाए, नियमों का पालन करना ही ना बताया जाए, तो जाहिर सी बात है आगे चलकर वह बच्चा अनुशासनहीन ही बनेगा और ऐसे में बेहद मुश्किल हो जाएगा कि वह समाज में निर्धारित किसी भी नियम को पूरी तरीके से माने। ऐसे में किसी माता-पिता के लिए बहुत बड़ी ड्यूटी है, कि वह अपने बच्चे को अनुशासन सिखाएं। यह आज के मॉडर्न समय में जहां माता पिता के पास समय कम है, और प्रत्येक बच्चे के हाथ में मोबाइल फोन है, और वह दिन रात अपने मोबाइल फोन में अवांछित चीजों को देखता रहता है, ऐसे में उसे अनुशासित करना क्या इतना आसान होगा? लेकिन आज हम आपको ऐसे ही कुछ महत्वपूर्ण तरीके बताएंगे जिन्हें आजमाने के बाद निःसंदेह आप अपने बच्चे के दिलो-दिमाग में अनुशासन नाम की चीज को ला पाने में सफलता प्राप्त करेंगे। आइए जानते हैं... 


अनुशासन के लिए बच्चे के 'टच' में रहें 

एक समय था जब कहा जाता था कि बच्चों के साथ घुलमिल के रहने वाले लोगों से बच्चे नहीं डरते हैं, और जो लोग बच्चों से रूखे -रूखे रहते हैं, कम बोलते हैं, उनसे बच्चे डरते हैं और उन्हीं से कुछ सीख भी पाते हैं! 

लेकिन इन बातों में इतनी सच्चाई प्रतीत नहीं होती है, हालांकि जो बच्चों से दूर रहते हैं कभी - कभार उन्हें मिलते हैं, तो क्षण भर के लिए बच्चे उनसे डरते जरूर है, लेकिन या कहना बिल्कुल गलत होगा कि 'डर और अनुशासन' एक चीज है। डर थोड़ी देर के लिए होता है और अनुशासन दिनचर्या का हिस्सा होता है। 

ऐसे में अगर आप अपने बच्चे के 'टच' में रहते हैं, उससे घुल मिलकर रहते हैं, तो आप आसानी से जान पाएंगे कि आपके बच्चे के मन में क्या बातें चल रही हैं?  और आप जब अपने बच्चे के बारे में ज्यादा से ज्यादा जान पाएंगे, जाहिर सी बात है उसकी परेशानियों को दूर करने में आपको ज्यादा सहायता मिलेगी। ऐसे में बच्चे को डराने की जगह अनुशासित करने का मंत्र आपको समझ में आएगा। 


बच्चे की गलतियों को अनदेखा न करें, बल्कि लगातार वार्निंग दें! 

कई बार माता-पिता यह समझ कर अपने बच्चे की गलतियों को अनदेखा कर देते हैं, कि यह उसकी पहली गलती है या दूसरी गलती है, छोड़ो जाने दो। लेकिन अगर आप अपने बच्चे को अनुशासित बनाना चाहते हैं, तो उसकी गलतियों पर लगातार नजर रखें और उसे लगातार टोकते रहें। अपने बच्चे को जरा भी अहसास न होने दें कि उसकी गलतियों पर किसी की नजर नहीं है, और वह जो चाहे गलती करके उसे छुपा सकता है। अगर आप अपने बच्चे की गलती पर वार्निंग देंगे तो उसे पता चल जाएगा कि उसकी किसी भी गलती को छुपाना उसके लिए संभव नहीं है। ऐसे में वह गलतियां करने से बचेगा और धीरे-धीरे अनुशासन की तरफ अपने आप को मोड़ने लगेगा। 


लगातार हो रही गलतियों के लिए 'कड़ा एक्शन' लें'  

अगर आपको लग रहा है, कि आपका बच्चा लगातार वार्निंग के बाद भी गलतियों को दुहराए जा रहा है, तो अब वह समय आ गया है जब आप अपने बच्चे की गलतियों के लिए उस पर 'कड़ा एक्शन' लें !

जी हां, बच्चे के दिमाग में कभी भी यह बात नहीं जानी चाहिए कि उसकी गलती पर उसे उसके माता-पिता उसे डरा धमका कर या वार्निंग देकर छोड़ देंगे, बल्कि उसे यह पता होना चाहिए कि एक लिमिट क्रॉस होने के बाद उसके साथ कड़ाई से बर्ताव किया जाएगा। हालाँकि अपने बच्चे के लिए किसी भी  पनिशमेंट को तय करने से पहले आप अपने बच्चे की मनोदशा का ध्यान अवश्य रखें और इस बात का भी ध्यान रखें कि वह किस हद तक सजा को सहन कर सकता है। 


बच्चे द्वारा की गई गलतियों के दुष्परिणाम को बताएं 

अगर आपका बच्चा कोई गलती कर रहा है, तो ना बल्कि उसकी गलतियों को बताएं, बल्कि उसकी गलतियों के जो दुष्परिणाम सामने आते हैं, उन्हें भी अपने बच्चे को समझाएं। जाहिर सी बात है कि अपने द्वारा किए गए गलत कार्यों के दुष्परिणाम को सामने देखने के बाद बच्चा उस गलती को महसूस करे! आप कुछ ऐसे समझ सकते हैं कि अगर आपके बच्चे ने घर में मौजूद किसी चीज को तोड़ दिया है, तो उसे डांट फटकार लगाने के बाद यह अवश्य बताएं कि इस चीज के टूट जाने से घर में क्या चीज का नुकसान हुआ है, और घर के बाकी सदस्यों को इस वजह से कितनी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। अगर आप ऐसा समझाने में सफल हो पाते हैं, तो आप देखेंगे कि धीरे-धीरे बच्चा ऐसी गलतियां करने से बचेगा। 


बच्चे को सजा देने के बाद 'काउंसलिंग' बेहद जरूरी 

जब भी किसी गलती की पनिशमेंट आप अपने बच्चे को देते हैं, तो यह ध्यान रखने की आवश्यकता है कि सजा देने के बाद बच्चे को कहीं अलग-थलग ना छोड़ें! बच्चों का मन बहुत कोमल होता है, और उन्हें दुनियादारी की भी इतनी समझ नहीं होती है, ऐसे में सजा पाने के बाद उनके मन में तमाम ऐसे विचार आते हैं, जिनकी वजह से वह कोई गलत हरकत कर सकते हैं, या फिर सजा देने वाले माता पिता के खिलाफ उनके मन में क्रोध की भावना भर सकती है। 

ऐसे में अगर आपने अपने बच्चे को कोई सजा दी है, तो उस सजा के बाद अपने बच्चे के साथ बैठे और उसके साथ समय बिताएं और कम से कम आधे घंटे तक बच्चे की काउंसलिंग करें, उसे समझाएं, उसकी गलतियों को शांतिपूर्वक उसे बताएं। इतना ही नहीं आप अफसोस भी व्यक्त करें कि सजा देने के बाद आपको भी बेहद दुख होता है। ऐसे में बच्चे के मन में चल रही उथल-पुथल को शांति मिलेगी और वह माता पिता के प्रति ग्लानि से नहीं भरेगा। 


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Article Title: बच्चों को अनुशासित करना क्यों है जरुरी, और कैसे करें? Why is it important to discipline children, and how to do it?


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