Family Learnings from Ramayna Episode 1


 

साल 1987 - 88 के बीच जब दूरदर्शन पर रामायण धारावाहिक प्रसारित हुआ था तो धारावाहिक की चर्चा बड़े लंबे समय तक चली। आंकड़े कहते हैं कि उस समय देश के 82% लोगों ने रामायण धारावाहिक को टेलीविजन पर देखा था। अगर आज के समय में बात करें तो पिछले साल जब कोरोना के समय लॉकडाउन लग गया और सब लोग अपने घरों में कैद हो गए, तो एक बार फिर दूरदर्शन पर रामायण को प्रसारित किया गया और लोगों ने उतने ही उत्साह और उमंग से इस धारावाहिक को देखा। बता दें कि गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस के माध्यम से लोगों को यह बताने का प्रयास किया गया है कि जब जब धरती पर दुराचार बढ़ेगा, पाप बढ़ेगा तब तब इस दुराचार और पाप को समाप्त करने के लिए एक दिव्य शक्ति धरती पर अवतरित होगी।

 

हालांकि इसमें महत्वपूर्ण रूप से यह बात बताने का प्रयास किया गया है कि किस प्रकार प्रभु श्री राम ने मानव रूप में जन्म लेकर मानवीय गुणों को, मानवीय आचरण का पालन करते हुए बुराई पर अच्छाई की जीत स्थापित की। आज हम रामचरित मानस पर आधारित निर्माता निर्देशक रामानंद सागर द्वारा कृत रामायण धारावाहिक के पहले एपिसोड में वर्णित प्रभु श्री राम के कलाओं की चर्चा करेंगे। बता दें कि जैसे ही आप रामायण धारावाहिक का पहला एपिसोड देखेंगे तो आप देखेंगे कि अभिनेता अशोक कुमार इसमें बताते हुए प्रतीत होते हैं कि श्री रामचरितमानस की महिमा इतनी अपरंपार थी कि ना सिर्फ भारत में बल्कि विश्व की कई भाषाओं में रामचरितमानस को लिखा गया है। इतना ही नहीं भारत की भी तमाम क्षेत्रीय भाषाओं में राम चरित्र मानस का वर्णन हुआ है और इस धर्म ग्रंथ को लिखा गया है। इस पहले एपिसोड में आपको दिखाया गया है कि किस प्रकार धरती पर जब दुष्ट रावण अपनी बुराइयों का अत्याचार फैलाया हुआ है, तो सभी देवता भगवान विष्णु की शरण में पहुंचते हैं और उनसे धरती के संरक्षण की गुहार लगाते हैं। देवता कहते हैं कि रावण अब अपने आप को अमर मान चुका है और उसे ऐसा लगता है कि उसका अंत नहीं होगा।

 

इसके पीछे वजह यह है कि उसने स्वयं ब्रह्मा जी और शंकर भगवान से ऐसा वर प्राप्त कर लिया है, कि उसे देव, दानव, नाग, किन्नर और गंधर्व किसी के हाथों उसकी मृत्यु नहीं हो सकती है। ऐसे में विष्णु भगवान यह कहते हैं कि धरती पर ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है, जिसने जन्म लिया हो और उसकी मृत्यु ना हो। रावण ने भी अपने घमंड में चूर होकर मनुष्य और बंदरों के हाथ से ना मरने का वरदान नहीं मांगा है, क्योंकि वह मनुष्य और बंदरों को तुक्ष समझता है। ऐसे में मैं स्वयं अपनी कलाओं सहित धरती पर राजा दशरथ के यहां जन्म लूंगा और रावण का वध कर यह सुनिश्चित करूंगा कि बुराई पर हमेशा ही अच्छाई की जीत होती है। इसके बाद धारावाहिक में आगे दिखाया जाता है कि राजा दशरथ अपने संपूर्ण राज, वैभव, सुख, समृद्धि के होने के बावजूद भी संतान न होने को लेकर व्यथित हैं।

 

ऐसे में उनके कुल गुरु महर्षि वशिष्ठ उन्हें बताते हैं कि आपको संतान प्राप्ति करने के लिए यज्ञ करना होगा और उस यज्ञ के लिए आपको महर्षि श्रृंग मुनि को आग्रह पूर्वक मनाना होगा। इसके लिए आपको याचक के रूप में श्रृंग मुनि के पास जाना होगा ना कि राजा के रूप में! बता दें कि इसके बाद श्रृंग मुनि ने संतान प्राप्ति के लिए यज्ञ किया और राजा दशरथ को चार पुत्रों की प्राप्ति हुई। जिसमें महारानी कौशल्या ने राम को जन्म दिया, तो वहीं कैकई ने भरत, तो रानी सुमित्रा ने लक्षमण और शत्रुघ्न को जन्म दिया। कुल गुरु वशिष्ट के द्वारा चारों राजकुमारों का नामकरण होता है और पहला यह एपिसोड यहीं पर समाप्त हो जाता है। 

सीखने योग्य बातें 

इस पूरे एपिसोड में मनुष्य को धारण करने योग्य कुछ बातों को देखा जाए तो सबसे पहले यह बात निकलकर सामने आती है, कि बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों ना हो उसका नाश निश्चित है। 

इसके अलावा जो दूसरी बात इस एपिसोड में मुझे सीखने योग्य लगी वह यह है कि जब भी आप किसी व्यक्ति से कुछ पाने या मांगने की इच्छा रखते हैं, तो उसके सामने आपको अपने ज्ञान, धन आदि का आडंबर ना करते हुए एक याचक, एक प्राप्तकर्ता के रूप में प्रस्तुत होना चाहिए। अगर आप याचक बन कर नहीं मागेंगे तो संभव है आपको वह चीज़ ना मिल पाए जिसकी आपने आशा की है।  

नीचे दिए लिंक पर आप क्लिक कर रामायण का पहला एपिसोड देख सकते हैं। 
जय श्री राम 



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